गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें? (Hindi Edition) por Mahesh Kaushik

August 19, 2019

गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें? (Hindi Edition) por Mahesh Kaushik

Titulo del libro: गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें? (Hindi Edition)

Autor: Mahesh Kaushik

Número de páginas: 61 páginas

Fecha de lanzamiento: March 11, 2017

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Mahesh Kaushik con गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें? (Hindi Edition)

क्या आपको गीता का ज्ञान याद है? क्या आप गीता में बतायी जीवन शैली जी रहें है ? गीता के अनुसार जीवन जीने से आप कैसे महान बन सकते हैं? गीता भारत का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है यह कोई मत पन्थ या धर्म नहीं है यह एक सम्पूर्ण जीवन शैली है यदि आप गीता को जीवन में उतार लेते हैं तो आप अपना जीवन प्रसन्ता ओर आन्नद से जी सकते हैं आप किसी भी मत पन्थ या धर्म को मानते हो इस पुस्तक में कोई नया धर्म या पन्थ नहीं बताया गया है केवल आपके प्राचीन धर्मग्रन्थ गीता का ज्ञान सार में लिखा गया है। इस पुस्तक को अवश्य पढिये क्यों कि यह आपकी जीवन की दिशा को बदल सकती है।
यह पुस्तक हर उस मानव मात्र के लिये लिखी गयी है जो अपने जीवन के उच्च आदर्शों व उच्च उदेश्शयों को भुल चुका है तथा धर्म क्या है यह भी नहीं जानता न हीं धार्मिक पुस्तकों को पढने में उसका मन लगता है तथा नही वो इन धार्मिक पुस्तकों को मानता है।
इस पुस्तक को दो तीन बार मन लगाकर सच्चे मन से पढें तथा तब आपको समझ में आयेगा कि आपको किसी प्रवचन या उपदेश की आवश्यकता नहीं है हजारों वर्ष पहले का यह उपदेश आज भी आपके जीवन को बदल सकता है।
बस आवश्यकता इतनी सी है कि आप इस पुस्तक को जब भी समय मिले थोड़ी देर के लिये कहीं से भी खोल कर पढ लेवें आपकी आत्मा को शांति और सकून मिलने के साथ साथ आपके मन की सुप्त शक्तियां अपने आप जागने लगेगी व आपकी सभी समस्याओं का समाधान अपने आप मिलने लगेगा।
यदि आप इस पुस्तक का एक पेज भी रोज पढते हैं तथा मन से उस पर मनन करने व अनुसरण करने की कोशिश करते हैं तो आपको सात दिन में ही महसुस होने लगेगा कि कोई अदृश्य सर्वशक्तिमान सता आपकी समस्याओं को सुलझाने में आपका मागदर्शन कर रही है ये वही सता है जो अर्जुन को महाभारत युद्ध में मागर्दशन दे रही थी आज आपको मार्गदर्शन देने के लिये तत्पर है बस आपको इस सता के सरल ज्ञान को जीवन में उतारने का प्रयास भर करना है।
ये सर्वशक्तिमान सता जिसे ईश्वर कह सकते हैं पाश्चत्य लेखक इसे अवचेतन मन कहते हैं यह वही सता है जिसने इस सम्पूर्ण सृष्टि का निमार्ण किया है तथा जो ये सारा ब्रहमान्ड संचालित कर रही है आप इस पुस्तक में बताये गीता के सार को रोज थोड़ा थोड़ा पढनें लगेगें तो आपके मन की ये शक्तियां अपने आप जागृत होने लगेगी।
मैं इस ज्ञान का लेखक नहीं हुं ना ही कोई गुरू या धार्मिक उपदेशक हुं मैने इस प्राचीन ज्ञान को हमारे ग्रन्थ गीता से लिया है तथा इस ज्ञान को नोटस की तरह सरल रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास भर किया है इससे यदि आपको कोई लाभ मिलता है तो कृपया मुझे गुरू उपदेशक या ज्ञानी मानने की भुल ना करें आपको जो लाभ मिला है वो उस सर्वशक्तिमान सता ने दिया है क्यों कि इस पुस्तक की सहायता से आप उसके सिद्धान्तों के प्रति जागरूक हो गयें हैं व आपने अपना दृष्टिकोण बदल लिया है उससे आपके अपने मन की शक्तियों ने जागकर आपके जीवन में ईश्वर का मार्गदर्शन देना शुरू कर दिया है।
एक बार पुनः निवेदन है कि इस पुस्तक से लाभ लेना बहुत आसान है आपको ना तो कोई कर्मकाण्ड करना है ना ही कोई प्रसाद चढाना है ना ही कोई दीपक जलाना है। बस इस पुस्तक का एक अध्याय या एक पृष्ठ या आपको समय हो तो पुरी पुस्तक एक बार प्रतिदिन पढने से आप सात दिनों में ही ईश्वरीय सहायता को अपने दैनिक जीवन में महसूस करने लगेंगें व चमत्कार होते देखेगें जो दरअसल चमत्कार नहीं हैं आपके दृष्टिकोण के बदल जाने से हुये सकारात्मक परिणाम है जो आपको चमत्कार लगेगें।